क्रॉउन ऑफ किलकारी - किलकारी की गतिविधियों में हर स्तर पर बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बच्चों की कर्इ समितियाँ संचालित हैं-

किलकारी के बच्चों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिये प्रतिमाह एक बच्चे को 'क्रॉउन ऑफ किलकारी’ का ताज पहनाया जाता है। 'क्रॉउन ऑफ किलकारी’ के विजेता बच्चे का चयन 'क्रॉउन ऑफ किलकारी’ चयन-समिति के बच्चे करते हैं। इस विशिष्ट ताज के लिए बच्चों का चयन निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है-
* सृजनशील
* सहयोगी
* नियमित
* जिम्मेदार
* सक्रिय

बाल पंचायत - 'बाल पंचायत’ पाँच बच्चों की एक समिति हैं। पाँचों बच्चे पंच होते हैं। ये बच्चे (पंच) किलकारी के बच्चों की ऐसी समस्याओं को देखते हैं, जो साधारणत: हल नहीं हो सकती हैं। पंचों के समक्ष समस्या आती है, संबंधित बच्चों के द्वारा अपनी बात रखी जाती है एवं बाल पंचों के द्वारा निर्णय लिया जाता है। पंचों का निर्णय सर्वमान्य होता है।

बच्चों की इस समिति द्वारा 'किलकारी परिसर’ के नियमों का भी ध्यान रखा जाता है। भवन की साफ-सफार्इ, कैंटीन, बच्चों के व्यवहार (ड्रेस, आर्इ-कार्ड, मोबार्इल प्रयोग), चौकीदार का कार्य, पेड़-पौधों का भी ख्याल रखा जाता है। समिति के सदस्यों का समय-समय पर आवश्यकतानुसार बदलाव भी किया जाता है।

भवन रख-रखाव - बच्चों की यह समिति भवन की देखभाल के लिए बनार्इ गर्इ है। इस समिति में बच्चों के अलग-अलग वर्ग बनाए गए हैं, जो कि भवन के अलग-अलग विभाग के रख-रखाव पर ध्यान देते है। जैसे- बिजली से जुड़ी समस्या, पानी की समस्या, भवन में कहीं कुछ टूटा हुआ हो तो उसकी जानकारी बच्चों द्वारा कार्यालय में दी जाती है ताकि समस्या का समाधान जल्द किया जाए।
'गुल्लक’ बच्चा बैंक संचालन - इस समिति के तीन मानद सदस्य हैं। एक प्रबंधक और दो उप-प्रबंधक। बैंक संचालन के साथ-साथ उसका रख-रखाव, खातों की व्यवस्था एवं खातेदारों की सुविधा का ध्यान इस समिति के द्वारा विशेष रूप से रखा जाता है। इसके लिए हर महीने बैठक कर कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा की जाती है।
पुस्तकालय संचालन - अन्य समितियों की भाँति इस समिति की भी प्रतिमाह बैठक होती है| इस समिति द्वारा पुस्तकालय की पुस्तकों की देख-रेख, पुस्तकों का चयन एवं पुस्तकालय के कुशल संचालन में सहयोग, उनका क्रय आदि किया जाता हैं।
प्रबंध समिति - किलकारी के प्रबंध समिति के अध्यक्ष शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव होते हैं। इस प्रबंध समिति में भी दो बाल सदस्य नामित किये जाते हैं। ये बाल सदस्य किलकारी की आगामी रणनीति तय करने में सहयोगी होते हैं।
उम्र 16 से अधिक - 'किलकारी बिहार बाल भवन’ में बच्चों की प्रतिभागिता की आयु सीमा 16 वर्ष तक है। जब बच्चों की उम्र 16 वर्ष से अधिक हो जाती है, तो इस समूह के सारे बच्चों का एक समारोह में अभिनंदन किया जाता है। इन्हीं में से कुछ चुनिंदा बच्चों को उनके अनुरोध पर आगे भी किलकारी से जुड़े रहने की सुविधा दी जाती है। यह बच्चें सरकारी विद्यालयों एवं स्लम में बाल भवन के प्रशिक्षण एवं गतिविधि संचालन में सहयोग करते है।
अखबार प्रकाशन - प्रतिमाह ‘बाल किलकारी’ अखबार का प्रकाशन बाल सम्पादक मंडल द्वारा किया जाता है| इस अखबार प्रकाशन समिति में 10-12 बच्चें होते हैं जो महीने में एक बार दो से तीन दिनों की कार्यशाला आयोजित करते हैं| इस कार्यशाला में रचना करने के लिए बच्चों को आमंत्रित करते हैं| कार्यशाला के दौरान बच्चों द्वारा रचित रचनाओं की प्रस्तुतियाँ बाल सम्पादक मंडल द्वारा कराई जाती है| साथ ही रचनाओं पर प्रतिक्रियाएँ देकर बेहतर रचनाओं का चयन करते हैं और ‘बाल किलकारी’ अखबार का प्रकाशन किया जाता है|